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“बीजेपानी में सरकारी खजाने पर डाका: मासूम बांसों का कत्लेआम करने ‘नेताजी’ के दरबार पहुंचे माफिया, सुबह से शाम तक घनघनाते रहे सरपंच – सचिव के फोन।”

छिंदवाड़ा : छिंदवाड़ा जनपद पंचायत के ग्राम बीजेपानी (धौलपुर) में सरकारी संपत्ति की सरेआम लूट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ लगभग 20 एकड़ शासकीय भूमि पर खड़े बेशकीमती बांस के जंगल को माफिया और रसूखदारों की जुगलबंदी ने ‘मैदान’ बनाने की ठान ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कटाई को अंजाम देने के लिए ठेकेदार और उसके सिपहसालारों ने पूरे प्रशासनिक और राजनैतिक तंत्र को दांव पर लगा दिया है।

तहसील से नहीं बनी बात, तो नेताजी के दरबार पहुंचे ठेकेदार

सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार संजू और उसके सहयोगियों ने इस बेशकीमती जंगल को काटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। जब तहसील कार्यालय ने नियमों के विरुद्ध जाकर अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया, तो मामला ‘सियासी गलियारों’ में पहुंच गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार को एक कद्दावर नेता का संरक्षण प्राप्त है। आलम यह था कि ग्रामीण और ठेकेदार नेताजी के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे ताकि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।

ठेकेदार संजू पर ‘खास’ मेहरबानी

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि ठेकेदार संजू पर एक कद्दावर ‘नेताजी’ का खासम–खास है। जब टीम छापेमारी करने पहुंची, तो पर्दे के पीछे से सिफारिशों का दौर शुरू हो गया। — “भाई साहब, एक बार तहसीलदार साहब को फोन घुमा दीजिए।”

सरपंच-सचिव पर दबाव: “भाई साहब, तहसीलदार को फोन कर दो”

पूरे दिन बीजेपानी के सरपंच और सचिव के फोन घनघनाते रहे। 1 दर्जन से ज्यादा छोटे बड़े नेताओं ने फोन कर ‘आपसी समझौते’ और कटाई होने देने का दबाव बनाया। सिफारिशों का दौर यहाँ तक पहुँच गया कि नेताओं से गुजारिश की जाने लगी— “भाई साहब, एक बार तहसीलदार साहब को फोन घुमा दीजिए, काम हो जाएगा।”

नियमों की धज्जियां: 2001 में ही खत्म हो चुकी है समिति

जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस समिति के नाम पर या जिसकी आड़ में यह खेल चल रहा था, उसका अस्तित्व ही वर्ष 2001 में समाप्त हो चुका है। बिना किसी वैध अनुमति के, मृत समिति के नाम पर लाखों के बांस की बलि दी जा रही है।

एक्सपर्ट व्यू: अभी ‘बच्चा’ है बांस का जंगल

वन विभाग के अधिकारियों ने तकनीकी पक्ष रखते हुए बताया कि वर्तमान में जिस बांस को काटा जा रहा है, वह अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, “ये बांस अभी ‘बच्चा’ है, इसे परिपक्व होने में अभी 2 से 3 साल और लगेंगे। समय से पहले कटाई करना न केवल वित्तीय हानि है, बल्कि पर्यावरण के साथ भी खिलवाड़ है। नायब तहसीलदार, पटवारी, वन विभाग और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने बीजेपानी (धौलपुर) में छापेमारी की। टीम ने मौके से भारी मात्रा में कटे हुए अवैध बांस जब्त किए हैं, जिन्हें वन विभाग की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।

खबर : करण विश्वकर्मा – 99755432229