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विधायक निधि की सड़क पर कमीशन का ‘रोलर’ : लाखों की CC रोड में कमिशन फिक्स’ का खेल, गुणवत्ता जांचने पहुंचे अधिकारियों ने भी साधी चुप्पी…

छिंदवाड़ा : छिंदवाड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत उमरहर में चल रहे लाखों रुपए के सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता और कमीशन खोरी का मामला सामने आया है, विधायक निधि से स्वीकृत 320 मीटर सीसी रोड का निर्माण कार्य मानकों को ताक पर रखकर किया जा रहा है, जिसमें ठेकेदार, इंजीनियर, सरपंच और सचिव की खुली सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं।

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीसी रोड निर्माण में घटिया और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमेंट, गिट्टी और रेत के अनुपात में भारी गड़बड़ी की जा रही है, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

जनपद में ‘पैसा दो, काम ले जाओ’ का फॉर्मूला

इस पूरे घटिया निर्माण के पीछे छिंदवाड़ा जनपद पंचायत में वर्षों से चल रहा ‘कमीशन का खुला खेल’ बताया जा रहा है। आरोप है कि जनपद में बैठे अधिकारी कमीशनखोरी में इतने लिप्त हैं कि उन्हें ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण की गुणवत्ता से कोई सरोकार नहीं है।

सूत्र बताते हैं कि जनपद में दो अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने पंचायत स्तर के हर काम के लिए अपनी ‘कमीशन की दर’ तय कर रखी है। काम कैसा भी हो, चाहे वह घटिया ही क्यों न हो, अगर कमीशन मिल गया तो उसे क्लीन चिट मिल जाती है।

हाल ही में, जब उमरहर में निर्माण की शिकायतें बढ़ीं, तो जनपद पंचायत के यही दोनों कथित कमीशनखोर अधिकारी मौके पर जांच करने पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य में स्पष्ट खामियां होने के बावजूद, अधिकारियों ने सरपंच और सचिव से बातचीत करने के बाद काम को ‘सही’ करार दे दिया। सूत्रों का दावा है कि यह निरीक्षण केवल दिखावा था और कमीशन की लेनदेन के बाद ही अधिकारियों ने मौन सहमति दे दी।

राजनीतिक संरक्षण और नदारद इंस्पेक्टर

इस घटिया निर्माण को रोकने में विफलता का एक अन्य कारण स्थानीय राजनीतिक संरक्षण भी बताया जा रहा है। आरोप है कि सरपंच, सचिव और इंजीनियर को सत्ताधारी दल के एक स्थानीय नेता का ‘आशीर्वाद’ प्राप्त है, जिसके चलते ये निर्माण एजेंसियां बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

इससे भी गंभीर मामला जनपद पंचायत के निरीक्षण तंत्र से जुड़ा है। नियमानुसार, पंचायत इंस्पेक्टर को फील्ड पर जाकर लगातार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करनी चाहिए, लेकिन इंस्पेक्टर जनपद कार्यालय से बाहर ही नहीं निकलते। इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति में, कथित तौर पर कमीशन लेने वाले अधिकारी ही सीधे पंचायत पहुंचकर निरीक्षण की खानापूर्ति कर रहे हैं।

यह पूरा मामला स्पष्ट करता है कि छिंदवाड़ा जनपद पंचायत में जनहित के कार्य केवल भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का जरिया बन गए हैं, जहां लाखों रुपए की विधायक निधि का उपयोग घटिया निर्माण में किया जा रहा है। तत्काल प्रभाव से इस सीसी रोड निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच और कमीशनखोरी में लिप्त अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

खबर : करण विश्वकर्मा – 99755432229